Monday, 13 February 2023

विपक्ष का सवाल (ढुल-मुलअर्थव्यवस्था ) ? सरकार की नीतियों का जवाब (विकास)

 भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसमें तेजी से विस्तार करने वाला मध्यम वर्ग और युवा, शिक्षित श्रमिकों का एक बड़ा पूल है। गरीबी, असमानता और बुनियादी ढांचे के अंतराल सहित महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, देश ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है और भविष्य में निरंतर विकास के लिए तैयार है। यहां कुछ प्रमुख कारक हैं जो भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं।


जनसांख्यिकीय लाभांश: भारत में एक बड़ी और युवा आबादी है, जिसकी 60% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह देश के लिए अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन करने का एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है, जहां एक बड़ा और बढ़ता हुआ कार्यबल आर्थिक विकास को गति दे सकता है।


तेजी से शहरीकरण: भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है, लाखों लोग रोजगार के बेहतर अवसरों और उच्च जीवन स्तर की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर जा रहे हैं। यह प्रवृत्ति आर्थिक विकास को गति दे रही है और नए उपभोक्ता बाजार बना रही है, साथ ही व्यवसायों के लिए देश में निवेश करने के नए अवसर भी पैदा कर रही है।


तकनीकी प्रगति: भारत में एक संपन्न प्रौद्योगिकी क्षेत्र है और दुनिया की कुछ अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों का घर है। देश में प्रतिभाशाली इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों का एक बड़ा पूल है, और यह प्रौद्योगिकी और नवाचार में महत्वपूर्ण निवेश कर रहा है, जो आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता को चला रहे हैं।


बढ़ता मध्य वर्ग: भारत का मध्यम वर्ग तेजी से विस्तार कर रहा है, और यह उपभोक्ता खर्च और आर्थिक विकास को गति दे रहा है। मध्यम वर्ग भी अधिक परिष्कृत होता जा रहा है और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं की मांग कर रहा है, जो व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।


अनुकूल सरकारी नीतियां: भारत सरकार सुधारों को लागू करके और नौकरशाही की बाधाओं को कम करके अधिक व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए काम कर रही है। इससे व्यवसायों को शुरू करना और बढ़ना आसान हो गया है, जो निवेश और आर्थिक विकास को गति दे रहा है।


अंत में, भारत भविष्य में निरंतर विकास के लिए तैयार है, और ऐसे कई कारक हैं जो इस विकास में योगदान दे रहे हैं। अपनी बड़ी और युवा आबादी, इसके तेजी से शहरीकरण, इसकी तकनीकी प्रगति, इसके बढ़ते मध्य वर्ग और अनुकूल सरकारी नीतियों का लाभ उठाकर, भारत में आने वाले वर्षों में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की क्षमता है।

Sunday, 18 September 2011

लहरपुर में बिजली की सच्चाई

            हमारे लहरपुर के रहने वाले लोग और यहाँ से कुछ ना कुछ सम्बन्ध रखने वाले लोग यहाँ कि हर हकीक़त से अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि लहरपुर में विद्दुत कि हकीक़त क्या है| लहरपुर जिसे कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च  इंजन गूगल पे एक छोटे से शहर का दर्जा मिला हुआ है और यहाँ कि कुल आबादी लगभग एक लाख के करीब है, और यहाँ पर जब से बिजली कि सप्लाई शुरू हुई है तब से लेकर आज तक इसमे कोई सुधर नहीं देखने को मिला है बल्कि आपूर्ति ही सही ढंग से नहीं हुई है |

           इस समस्या का ये हाल है कि पूरे २४ घंटे में सिर्फ ३ घंटे दिन में और ९ घंटे रात के समय बाधा सहित आपूर्ति होती रहती है, जिसमे कि बिजली आने का कोई निश्चित समय तो नहीं है पर हाँ जाने का ज़रूर है, ऐसा लगता है कि जैसे कि मरीज़ को दवाई देने का समय हो गया है |
            सबसे बड़ी समस्या तो ये है कि विद्दुत कर्मचारी अपने कनेक्शन लोगो को बटते घुमते हैं और अपनी जेबें गर्म कर रहे है जिसमे छोटे से लेकर बड़ा अधिकारी सब बराबर के हिस्सेदार है| एक और बात ये भी है कि लोगो को बिजले मिले या ना मिले, सारे कस्बे में बिजली रहे या ना रहे पर हमारे नेताओं के घर तक एक अलग सिंगल लाइन बिछा कर उन्हें पूरी सप्लाई देना ज़रूरी होता है क्योकि आखिर वो हमारे नेता जो ठहरे | ऐसा लगता है कि जैसे आम जनता तो बिजली का बिल ही नहीं जमा करती हैं|
             कहने का मतलब सिर्फ इतना है के सारे अधिकारी एक तरफ से सब, सब के सब भ्रष्टाचार में लिप्त हैं| जहाँ पर ज़रूरी है कि दो ट्रांसफार्मर रखे जाये और दो लाइने बिछाई जाएँ वह पर कोई समस्या ही नहीं होती है बल्कि जहाँ पर कोई समस्या नहीं है वहां पर ट्रांसफार्मर रखना ज़रूरी होता है| अगर कहीं कोई समस्या है तो उसे निश्चित समय में ठीक किया जाना चाहिए पर विभाग के कर्मचारी अपने मन के मालिक है, जब मन आयेगा तब आएंगे | तारों कि स्थिति इतनी दयनीय है कि कब किसके ऊपर टूट कर गिर जाएँ पता नहीं | एक ट्रांसफार्मर से दो ही फेस चलते हैं(पर अब ट्रांसफार्मर ही बदल गया है पर बिछी लाइन वैसी कि वैसी है), अगर कोई तार सही नहीं है तो उस लाइन को ही काट दिया जाता है ना कि दूसरा तार बिछाया जाता है |

Monday, 20 June 2011

नत्था की सच्चाई

            फिल्म पीपली लाइव में हमने एक किसान की आत्म कथा को पर्दे पर देखा और तालियाँ मार मार के फिल्म को हिट करा दिया| पर क्या किसी ने उस कहानी को एक आम और वास्तविक किसान की कहानी से जोड़ कर देखा,नहीं ना | आज भी हमारे देश की आधी से अधिक आबादी गावों में रह रही है | ये वही किसान है जो हमारे खाने के लिए तपती धूप में मेहनत कर के अनाज उगाता है और आज वही किसान आत्महत्या कर रहा है |
            जिनके पास ज़मीन है सरकार उन्हें किसान की श्रेड़ी में जोडती है पर असल में ५-१० बीघे ज़मीन की मिलकियत रखने वाला ही असल किसान है जो अपने खेत में खुद मेहनत करता है | बहुत ज्यादा ज़मीन वाले तो ज़मीदार हैं जो मजदूरों से अपनी ज़मीन पर खेती करवाकर उन्हें दो वख्त का अनाज दे देते हैं | पर अधिक फायदा किसका हो रहा है, ५ बीघे वाले किसान का या ५० बीघे वाले ज़मीदार का|
            एक साल में दो फसले काटकर छोटे किसान का बस इतना ही मुनाफा है की वो अपने एवं अपने परिवार का पेट पाल सके और अगर कुछ बचा भी तो ज़मीदार से लिया क़र्ज़ कुछ कम कर सके | आज छोटे किसानो के ऊपर ज़मीदारो या बैंक का क़र्ज़ बढ़ता ही जा रहा है और सरकारी गोदामों में बेचे गए उसके अनाज का मूल्य घटा या एक जगह पर रुका हुआ है | बुंदेलखंड में किसानो की आत्महत्या का कारण अत्यधिक कर्ज में डूबा हुआ किसान ही है | ये भारत के किसान की कोई नई समस्या नहीं है,ये तो सदियों से चली आ रही रीत है की अगर किसान अपना क़र्ज़ न उतर पाए तो उसका बेटा तो है ही |

Saturday, 18 June 2011

लोकपाल बिल की पीड़ा

            अन्ना हजारे और बाबा राम देव के सारे प्रयास आज व्यर्थ होते नज़र आ रहे हैं | कुछ नेता लोग कभी इनका समर्थन करते नज़र आ रहे थे उन्होंने इसे आज एक राजनैतिक रूप दे दिया है | भ्रष्टाचार विरोधी कानून को पारित करने की बजाये नेता आज इसकी आग में राजनैतिक रोटियां सेंकते नज़र आ रहे हैं |
             राजनैतिक पार्टियों का ये आलम है की उन्होंने लोकपाल बिल की आड़ में वोट हासिल करने के लिये  तू तू - मैं मैं करना शुरू कर दिया है | एक दूसरे को नीचा दिखने के चक्कर में वो इस महत्त्वपूर्ण बिल को भूल चुके हैं | आज हर एक समाचार पत्र में सिर्फ इन्ही बातों का जिक्र होता है |
             क्या इसी तरीके से हम आपने भारत को एक सुद्रढ़ रूप दे सकेंगे ? अब तो सिर्फ यही लगता है कि हमारे भ्रष्ट नेता लोकपाल बिल के पारित होने से पहले ही एक साफ़ सुथरी छवि बना लेंगे, क्योकि लोकपाल बिल को पारित होने में वो हर तरह का अडंगा लगा रहे हैं, और तब तक उनके सारे काले कारनामो क़ी फाइलें किसी कचरे के ढेर में पहुँच चुकी होंगी |

Friday, 17 June 2011

जल बिन सब सून | समस्या कर्ता कौन ??

            पानी की समस्या आज एक आम समस्या बन चुकी है | हमारे देश की नदियों को ही देख लीजिये ,आज इनकी हालत बद से बत्तर होती जा रही है |  हर तरफ सूखे जैसा माहोल बनता ही जा रहा है | हमारी सरकार हर एक गाँव में मानव निर्मित तालाबों का निर्माड करा चुकी है पर उसके पास उसमे  भरने के लिये पानी नहीं है | आखिर सरकार के सामने ये विषमता क्यों आ रही है ?
             आज इस समस्या का सबसे बड़ा कारन कोई और नहीं हम खुद ही हैं | मेरे छोटे से शहर लहरपुर में अगर आप देखें तो यहाँ तो आप को हकीकत का अंदाज़ा आसानी से हो जायेगा | यहाँ आस पास के छेत्रों में पेड़ों की बहुत बेदर्दी से कटाई हो रही है वो भी पता नहीं की कब से |पर जिला प्रशासन पैसा खा कर चुप चाप बैठा है,जैसे की कुछ जनता ही न हो |
              अगर यहाँ के ये हालत हैं तो आपको सोचने में ज्यादा देर नहीं लगनी चाहिए की यही हलालत आज पूरे भारत में भी होंगे,शायद की इसमें गुंजाईश वाली कोई बात ही नहीं है | मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ की आज पेड़ों की अंधाधुंध  कटाई, अनेक तरह के प्रदूषण, वृक्षा रोपण में आई गिरावट तथा पानी का गलत ढंग से प्रयोग एवं जल स्त्रोतों में फालतू के चढ़ावे वाले ढोंगों को हमें रोकना चाहिए | 
               अगर आप या हम सब ऐसा न कर पायें तो वो दिन दूर नहीं जिस दिन हमे पानी की कीमत आपनी या अपने किसी परिवार जन की म्रत्यु से चुकानी पड़ेगी | कृपया एक कदम बढ़ाये.....

Thursday, 16 June 2011

भारत सरकार पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ नाकाम

       आज़ादी के साठ सालों से हम आतंकवाद से जूझ रहे हैं| सारी दुनिया को साफ़ - साफ़ पता है की भारत में आतंकवाद को कहाँ से बढ़ावा मिलता है | हम इतने सालों से पाकिस्तान  के खिलाफ कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं | एक तरफ अमेरिका है, जिसने अपने देश पर हुए हमले का मुहतोड़ जवाब दिया, और एक तरफ हम हैं की  संसद तथा मुंबई पर हुए इतने बड़े हमले का जवाब भी नहीं दे सकते |
       क्या अमेरिका ने अपने ऊपर हुए आतंकवादी हमले का जवाब देने से पहले किसी से पूछा था,नहीं ना तो फिर आज हमे किसी की इज़ाज़त की क्या जरूरत है ? हमारे देश पर आज भी छोटे- छोटे आतंकवादी हमले हो रहे हैं, जो की हमारे देश की जड़ो को काटने जैसा है | इस तरह के हमले ठीक उसी तरह हैं जैसे दीमक किसी पेड़ को खा जाती है | इनकी पैठ हमारे देश में और गहरी होती जा रही हैं | हमारी सरकार शायद इस पहलु पर कोई ध्यान  नहीं दे रही है| 
       सभी को पता है की पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आइएसआई भारत में आतंकवाद को बढ़ावे के लिये क्या कुछ नहीं कर रही है| अभी ताज़ा खुलासा हुआ है की पाकिस्तान भारत में सेवा निवृत्त सैन्य कर्मियों की भर्ती में अपने आतंकवादी भेजने की फ़िराक में था जिसके लिये आईसआई ने रिचर्ड हेडली को रूपये दिए थे | अगर ऐसा हो जाता तो वो दिन दूर नहीं था जिस दिन पाकिस्तान हम पर आसानी से सैन्य कार्यवाही कर देता |
        ऐसी घटनाओं में अगर पाकिस्तान कभी सफल हो गया तब हमारी सरकार शायद जाग जाए,पर तब तक कहीं देर ना हो जाये| इसलिए सरकार को इन बातो पर ध्यान देना होगा ताकि कभी हमें पाकिस्तान से हमें मुँह की ना खानी पड़े |

Monday, 13 June 2011

samay ki mang

           Har 1 samaj me 2 tarah ke log rehte hain jisme 1 ameer aor 2sra gareeb. Aaj ke samay ko agar dekhen toh har taraf vikas hota jara hai par vikas ke anupat ka tarazu amir gharano ki taraf tezi se jhukta hi ja raha hai.
           Es aniyamit jhukav ka sabse bada karan hamare gareeb yani ke nimna warg me chupa hua hai. Es warg me aap bahot hi asani se dekh payenge ki agar koi insan apne desh, samaj, evam kud ke liye agar kuch behtar karna bhi chahe to woh nahi kar payega, Eska sabse bada karan hai hamare samaj ke wo log jo kisi bhi insan ki tarakki ko nahi pacha pate hai. In logo ko ye nahi dikhta hai ki us admi ke karyon se kis-kis ka bhala hoga wo to us admi ki tarakki se ghabra jate hain aur ek dusre ki tang khichne ki har sambav koshish karne me lag jate hain.
            Aj hame enhi logon ko samjahane ka prayas karna chahiye jo hamare evam hamare Desh ki tarakki me bahot bade badhak ban rahe hain.