Sunday, 18 September 2011

लहरपुर में बिजली की सच्चाई

            हमारे लहरपुर के रहने वाले लोग और यहाँ से कुछ ना कुछ सम्बन्ध रखने वाले लोग यहाँ कि हर हकीक़त से अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि लहरपुर में विद्दुत कि हकीक़त क्या है| लहरपुर जिसे कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च  इंजन गूगल पे एक छोटे से शहर का दर्जा मिला हुआ है और यहाँ कि कुल आबादी लगभग एक लाख के करीब है, और यहाँ पर जब से बिजली कि सप्लाई शुरू हुई है तब से लेकर आज तक इसमे कोई सुधर नहीं देखने को मिला है बल्कि आपूर्ति ही सही ढंग से नहीं हुई है |

           इस समस्या का ये हाल है कि पूरे २४ घंटे में सिर्फ ३ घंटे दिन में और ९ घंटे रात के समय बाधा सहित आपूर्ति होती रहती है, जिसमे कि बिजली आने का कोई निश्चित समय तो नहीं है पर हाँ जाने का ज़रूर है, ऐसा लगता है कि जैसे कि मरीज़ को दवाई देने का समय हो गया है |
            सबसे बड़ी समस्या तो ये है कि विद्दुत कर्मचारी अपने कनेक्शन लोगो को बटते घुमते हैं और अपनी जेबें गर्म कर रहे है जिसमे छोटे से लेकर बड़ा अधिकारी सब बराबर के हिस्सेदार है| एक और बात ये भी है कि लोगो को बिजले मिले या ना मिले, सारे कस्बे में बिजली रहे या ना रहे पर हमारे नेताओं के घर तक एक अलग सिंगल लाइन बिछा कर उन्हें पूरी सप्लाई देना ज़रूरी होता है क्योकि आखिर वो हमारे नेता जो ठहरे | ऐसा लगता है कि जैसे आम जनता तो बिजली का बिल ही नहीं जमा करती हैं|
             कहने का मतलब सिर्फ इतना है के सारे अधिकारी एक तरफ से सब, सब के सब भ्रष्टाचार में लिप्त हैं| जहाँ पर ज़रूरी है कि दो ट्रांसफार्मर रखे जाये और दो लाइने बिछाई जाएँ वह पर कोई समस्या ही नहीं होती है बल्कि जहाँ पर कोई समस्या नहीं है वहां पर ट्रांसफार्मर रखना ज़रूरी होता है| अगर कहीं कोई समस्या है तो उसे निश्चित समय में ठीक किया जाना चाहिए पर विभाग के कर्मचारी अपने मन के मालिक है, जब मन आयेगा तब आएंगे | तारों कि स्थिति इतनी दयनीय है कि कब किसके ऊपर टूट कर गिर जाएँ पता नहीं | एक ट्रांसफार्मर से दो ही फेस चलते हैं(पर अब ट्रांसफार्मर ही बदल गया है पर बिछी लाइन वैसी कि वैसी है), अगर कोई तार सही नहीं है तो उस लाइन को ही काट दिया जाता है ना कि दूसरा तार बिछाया जाता है |

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